बागेश्वर का उत्तरायणी मेला 14 जनवरी से

बागेश्वर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान बन चुका उत्तरायणी मेला मकरसंक्रान्ति यानी 14 जनवरी 2026 से एक बार फिर भव्य रूप में आयोजित होगाl परंपरागत रूप से जनवरी के दूसरे सप्ताह में आयोजित होने वाला यह मेला एक सप्ताह तक चलेगा. हालांकि मेले की अंतिम तिथियों की आधिकारिक घोषणा अभी जिला प्रशासन द्वारा की जाएगीl
सरयू नदी के तट पर स्थित बागनाथ मंदिर परिसर, नुमाइशखेत, भोटिया मार्केट, अस्पताल रोड, तहसील रोड, पिंडारी रोड में लगने वाला यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि कुमाऊं की सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक और व्यापारिक गतिविधियों का भी प्रमुख मंच माना जाता है. मकर संक्रांति के दिन सरयू, गोमती और अदृश्य सरस्वती के त्रिवेणी संगम में स्नान का विशेष महत्व होता है, जिसके चलते दूर-दराज के इलाकों से श्रद्धालु और पर्यटक बागेश्वर पहुंचते हैं. उत्तरायणी मेला स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों के लिए भी बड़ी उम्मीद लेकर आता है. मेले में पारंपरिक ऊनी वस्त्र, स्थानीय हस्तशिल्प, पहाड़ी उत्पाद, जड़ी-बूटियां और खानपान की दुकानें सजती हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है. इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोकनृत्य, झोड़ा-चांचरी, छोलिया नृत्य और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां कुमाऊं की समृद्ध विरासत को जीवंत कर देती हैं. उत्तराखंड के लोक कलाकारों की स्टार नाइट, लेजर शो भी आयोजित किया जाता है. इतिहास की बात करें तो उत्तरायणी मेला केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का भी प्रतीक रहा है. स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में भी इस मेले ने जनजागरण की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. आज भी यह मेला परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है.