महिला आरक्षण बिल का विरोध करने वालों को नारी माफ नहीं करेगीः मोदी
लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े बिल पेश
प्रधानमंत्री बोले महिला आरक्षण बिल का राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं
विपक्ष ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को लागू करने की अपील की, परिसीमन प्रक्रिया पर आपत्ति जताई
नई दिल्ली। संसद के विस्तारित बजट सत्र का तीन दिनों का विशेष अधिवेशन आज से शुरू। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण अधिनियम संबंधी संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि इसे राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है और जो भी इसका विरोध करेंगे उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
उन्होंने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर यह भी कहा कि इस विषय को राजनीति के तराजू से नहीं तौलना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘राष्ट्र के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं और उस समय समाज की मनःस्थिति और नेतृत्व क्षमता उस पल को ‘कैप्चर’ करके एक राष्ट्र की अमानत और धरोहर बना देती है। संसदीय इतिहास में आज ऐसा ही एक पल है।’’
मोदी ने कहा कि महिला को मिलने वाले अधिकार का जिस-जिस ने विरोध किया, महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया, उनका बुरा हाल हुआ। 2024 के चुनाव में यह नहीं हुआ, क्योंकि (2023 में) सबने मिलकर इसे पारित किया था।’’ उन्होंने कहा कि जिन्हें इसमें राजनीतिक बू आ रही है, वे पहले के परिणामों को देख लें।
उन्होंने कहा कि ‘‘मैं समझता हूं कि इसे राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।’’ मोदी ने कहा कि जो विरोध करेंगे उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। इस विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर फोकस किया जाएगा।
विपक्षी पार्टियों की चिंताओं का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को साफ किया कि परिसीमन आयोग हर राजनीतिक पार्टी से सलाह-मशविरा करेगा। विपक्ष ने साफ किया कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है और उसने सरकार से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को लागू करने की अपील की, लेकिन उसने परिसीमन प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। विपक्ष का मानना है कि इस प्रक्रिया से लोकसभा में दक्षिणी और पूर्वाेत्तर राज्यों का प्रतिनिधित्व कमजोर होगा।
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा के मैं उन लोगों को भी सलाह देना चाहूंगा जो केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से सोचते हैं। हमारे देश में जब से महिला आरक्षण पर चर्चा शुरू हुई है, और उसके बाद हुए हर चुनाव में, जिसने भी महिलाओं के इस अधिकार का विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया है।
हम इसे पहले ही विलंबित कर चुके हैं। कारण चाहे जो भी हो, जो भी जिम्मेदार हो, हमें इस वास्तविकता को स्वीकार करना होगा। मुझे पता है कि जब यह प्रक्रिया चल रही थी, तब सभी पक्षों से परामर्श किया गया था। एक पक्ष को छोड़कर, जिनसे भी हम मिले, किसी ने भी सैद्धांतिक विरोध नहीं उठाया। बाद में जो भी हुआ हो, अब एक राजनीतिक दिशा तय की जा रही है।
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैंने शुरुआत में ही कहा था कि हम सभी भाग्यशाली हैं कि हमें देश की आधी आबादी से जुड़े इस महत्वपूर्ण, राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिला है।
हम सांसदों को इस महत्वपूर्ण अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। हम भारतीय मिलकर देश को एक नई दिशा देंगे। हम अपनी शासन प्रणाली में संवेदनशीलता लाने के लिए सार्थक प्रयास करेंगे। यह न केवल देश की राजनीति को आकार देगा, बल्कि देश की दिशा और स्थिति को भी निर्धारित करेगा।ष्