घास काट रही महिला पर प्रकट हुई मां मठियाणा देवी, दमयंती की तेज हुंकार से घबराकर भागा गुलदार
बावई गांव में बना है गुलदार का आतंक
रुद्रप्रयाग। जिले के बैंजी गांव के सुनसान खेतों में घास काट रही बावई गांव की दमयंती देवी की हालत दोपहर उस वक्त दहशत में बदल गई, जब अचानक उनके सामने गुलदार आ खड़ा हुआ। बेहद नजदीक से हुई यह मुठभेड़ किसी को भी भयभीत कर सकती थी, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार उसी क्षण दमयंती देवी पर उनकी कुलदेवी मठियाणा देवी की शक्ति का अवतरण हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार देवी शक्ति के प्रकट होने के साथ ही दमयंती देवी ने तेज हुंकार भरी, जिसे सुनकर गुलदार घबराकर जंगल की ओर भाग गया।
घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में इस चमत्कार की चर्चा जोरों पर है। पहाड़ों में आपदा या संकट के समय कुलदेवताओं के स्मरण और चमत्कारी बचाव की कहानियां अक्सर सुनाई देती हैं और यह घटना उनमें एक नई कड़ी बन गई है। दमयंती देवी खुद बताती हैं, ’’मैं सौभाग्यशाली हूं कि समय पर देवी मां ने मुझ पर अवतरण किया। वरना आज मैं शायद जिंदा न होती। मैं अकेली खेतों में घास काट रही थी। दोपहर के समय गुलदार आने की कोई आशंका नहीं थी। जैसे ही वह मेरे सामने आया, मैं बस अपनी मायके की कुलदेवी मठियाणा माई को पुकारने लगी और उसी शक्ति ने मुझे बचाया। बच्चों तक पर हमले हुए हैं और कई जानें जा चुकी हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि अब पहाड़ों में हर जंगल, खेत और रास्ता गुलदार के भय से घिरा है। घर से निकलना मुश्किल हो गया है तो खेतों में जाना जोखिम भरा। बावई गांव से बेंजी गांव तक गुलदार अब रात की बजाय दिन में घात लगाकर शिकार की तलाश में है। कब कौन उसका निवाला बन जाए, कहा नही जा सकता। लेकिन इस डर से अब दिन में भी क्षेत्र में दहशत छाई है।
चर्चा में रहा बेंजी गाँव 1918 से 1926 के बीच
रुद्रप्रयाग। आदमखोर गुलदार 125 से अधिक लोगों को मार डाला था और इसने पूरे इलाके में दहशत फैला रखी थी। मशहूर शिकारी जिम कॉब्रेट ने आखिरकार 2 मई 1926 को रुद्रप्रयाग में इस तेंदुए का शिकार किया था। बताते हैं इस आदमखोर का पहला शिकार बेंजी गाँव के ही एक बुजुर्ग हुऐ थे। तब ग्रामीणों ने गांव की कुलदेवी के शेर को गांव की रक्षा के लिए प्रकट किया था, फिर कभी गुलदार ने यहां हमला नहीं किया।