दिल्ली में साइप्रस उच्चायोग ने ईयू काउंसिल प्रेसीडेंसी की शुरुआत का मनाया जश्न
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने किया संबोधन
नई दिल्ली। भारत में साइप्रस गणराज्य के उच्चायोग ने सोमवार को नई दिल्ली में यूरोपीय संघ (EU) की काउंसिल की साइप्रस प्रेसीडेंसी के शुभारंभ के अवसर पर एक भव्य स्वागत समारोह का आयोजन किया। यह कार्यक्रम इम्पीरियल होटल, जनपथ स्थित रॉयल बॉलरूम में आयोजित हुआ, जिसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, राजनयिक, नीति-निर्माता और विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि भारत में साइप्रस के उच्चायुक्त एवागोरस व्रायोनिडेस ने स्वागत संबोधन दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एवागोरस व्रायोनिडेस ने यूरोपीय संघ की काउंसिल की अध्यक्षता संभालने पर प्रसन्नता व्यक्त की और साइप्रस की प्रेसीडेंसी की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि साइप्रस एक स्वायत्त, सशक्त और वैश्विक दृष्टिकोण वाले यूरोपीय संघ को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, रक्षा सहयोग, नवाचार और ट्रांसअटलांटिक संबंधों को मजबूती देना प्रमुख लक्ष्य हैं।
उन्होंने भारत और साइप्रस के ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्तों की नींव गुटनिरपेक्ष आंदोलन से जुड़ी रही है। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस नेतृत्व के बीच हुए संवादों से द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिली है। व्यापार, पर्यटन, रक्षा, प्रौद्योगिकी और जन-जन के संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाओं पर भी उन्होंने जोर दिया।
आगामी कूटनीतिक गतिविधियों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि आने वाले महीनों में साइप्रस से भारत के कई उच्च-स्तरीय दौरे प्रस्तावित हैं, जिनमें एआई शिखर सम्मेलन में उप मंत्री की भागीदारी, रायसीना डायलॉग में विदेश मंत्री की उपस्थिति तथा मई 2026 में साइप्रस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा शामिल है।
अपने संबोधन में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने साइप्रस को ईयू काउंसिल की प्रेसीडेंसी संभालने पर बधाई दी और इसे भारत-ईयू संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने साइप्रस की “ऑटोनॉमी” की अवधारणा और भारत के आत्मनिर्भर भारत विजन के बीच समानताओं को रेखांकित किया।
हालिया भारत-ईयू शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए मंत्री ने डिजिटल परिवर्तन, स्वच्छ और हरित ऊर्जा, सुरक्षा व रक्षा, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चल रही वार्ताओं का भी जिक्र किया।
भारत-ईयू साझेदारी को “स्थिरता का आधार और वैश्विक भलाई की शक्ति” बताते हुए सिंह ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने में बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
समारोह का समापन राजनयिकों और अतिथियों के बीच अनौपचारिक बातचीत के साथ हुआ, जिससे भारत, साइप्रस और यूरोपीय संघ के बीच मजबूत होते कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों की झलक देखने को मिली।