लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव पर आज सदन में चर्चा का जवाब दिया
प्रमुख बातें
समय दिए जाने पर नहीं बोलना और फिर बाहर निकलकर यह शिकायत करना कि सदन में बोलने नहीं दिया गया, नेता विपक्ष की यह प्रवृत्ति अब एक्सपोज हो चुकी है
सीटों के हिसाब से देखें तो ओम बिरला जी ने मुख्य विपक्षी दल को हमारी पार्टी से अधिक बोलने का समय दिया
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ LOP के नेतृत्व में विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाया और अब नेता विपक्ष ख़ुद उस पर नहीं बोले
2025 के शीतकालीन सत्र में जर्मनी जाना हो, 2025 के बजट सत्र में वियतनाम या 2023 के बजट सत्र में इंग्लैंड, सदन की अहम कार्यवाहियों के दौरान मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता विदेशों में रहते हैं और बोलने नहीं देने की शिकायत करते हैं
धारा 370 की समाप्ति, तीन तलाक हटाने, CAA लाने या वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने, हर महत्त्वपूर्ण बहस से मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता अनुपस्थित रहे
संसद में बोलने के नियम होते हैं, यह कोई मेला नहीं है जहाँ कैसे भी बोल लो
मुख्य विपक्षी दल के नेता की संसद में उपस्थिति राष्ट्रीय औसत की तुलना में बहुत कम है
मुख्य विपक्षी पार्टी को 17वीं लोकसभा में लगभग 158 घंटे, और 18वीं लोकसभा में अब तक 71 घंटे बोलने का समय दिया गया है, जो प्रो-रेटा में हमारी पार्टी से बहुत अधिक है
विपक्ष के भाषण का 80% हिस्सा स्पीकर पर अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित नहीं था, स्पीकर के बहाने सिर्फ सरकार के विरुद्ध बोले
हम विपक्ष में रहते हुए कभी भी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाए, हमने स्पीकर के पद की गरिमा का संरक्षण करने का काम किया है
मुख्य विपक्षी पार्टी के सदस्यों ने लोकसभा स्पीकर के चैंबर में सुरक्षा खतरे की स्थिति पैदा की
हमने कभी विपक्ष की आवाज़ दबाने का काम नहीं किया, विपक्ष की आवाज़ दबाने का काम 1975 में हुआ था, जब पूरे विपक्ष को जेल में डाल दिया गया था
इससे पहले भी 3 बार अध्यक्ष पर अविश्वास प्रस्ताव आए हैं, लेकिन ओम बिरला जी एकमात्र ऐसे स्पीकर हैं जिन्होंने नैतिक आधार पर, जब से यह प्रस्ताव नामित हुआ, तब से अध्यक्षता नहीं की
दो-दो बार गलतियों से भरे अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को भी बिरला जी ने सुधार करवाकर स्वीकृत किया
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अक्साई चीन का 38 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और नेफा का बड़ा हिस्सा 1962 में चीन ने कब्जा लिया था, और यह मुख्य विपक्षी पार्टी के शासनकाल में हुआ
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मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता की झूठ से भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सदन में बहस की अनुमति न देकर ओम बिरला जी ने दशकों पुरानी संसदीय परंपरा का पालन किया है