निर्माणाधीन टैंक में दम घुटने से मां सहित दो बेटों की मौत

हल्द्वानी। शहर के गौलापार की कुंवरपुर न्याय पंचायत के मानपुर गांव में मंगलवार शाम पानी के निर्माणाधीन टैंक में दम घुटने से मां और दो बेटे अचेत हो गए। आनन-फानन उन्हें सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।

बताया जा रहा है कि बेटों की सलामती की आस में 65 वर्षीय सरस्वती देवी ने अपनी जान की परवाह किए बिना निर्माणाधीन पानी के टैंक में उतर गईं। उन्हें उम्मीद थी कि वह अपने लालों को मौत के मुंह से वापस ले आएंगी लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

टैंक में गैस की चपेट में आकर मां और उसके दोनों बेटों धर्मेंद्र और खुशाल की मौत हो गई। एक पल में हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया और मानपुर गांव मातम में डूब गया।

धर्मेंद्र बिष्ट और उनके छोटे भाई खुशाल सिंह जब पानी के टैंक में उतरने के बाद बाहर नहीं आए तो परिवार की सांसें थमने लगीं। आवाज लगाई गई, इंतजार किया गया लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। बाहर खड़े लोग हालात को समझने की कोशिश कर रहे थे। टैंक के भीतर खतरा था जिस कारण कोई भी मदद के लिए आगे आने की हिम्मत नहीं दिखा पाया।

इस बीच मां की ममता ने 65 साल की सरस्वती देवी को सोचने का मौका ही नहीं दिया। उन्होंने न अपनी उम्र देखी, न अपनी जिंदगी का डर। कांपते कदमों से वह टैंक की सीढ़ियों तक पहुंचीं और अपने बेटों धर्मेंद्र और खुशाल को बचाने के लिए नीचे उतर गईं।

शायद उन्हें उम्मीद थी कि वह अपने बच्चों को वापस लेकर लौटेंगी लेकिन नियति ने कुछ और ही लिख रखा था।टैंक में उतरने के बाद वह भी अचेत हो गई। एक मां अपने लाडलों को बचाने गई थी लेकिन अपने दोनों बेटों के साथ खुद भी लौटकर नहीं आ सकी।

अस्पताल में डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया और देखते ही देखते पलभर में हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया गया।धर्मेंद्र और खुशाल सिंह के पिता भीम सिंह की 12 साल पहले एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी।

इसके बाद उनकी मां सरस्वती देवी ने किसी तरह परिवार को संभाला। सरस्वती की दो बेटियां हैं। दोनों की शादी हो चुकी है। खुशाल सिंह परिवार में सबसे छोटे थे। धर्मेंद्र अपने पीछे पत्नी, बेटा-बेटी जबकि खुशाल पत्नी और पुत्र को रोता बिलखता छोड़ गए हैं।

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