हृदय रोग से बचने के लिए स्वस्थ्य जीवनशैली जरूरी

गतिहीन जीवनशैली, अधिक तनाव, धूम्रपान आदि भी हृदय रोग के मुख्य कारण
देहरादून। अनियमित जीवनशैली, तनाव व कमजोर आहार भी हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। स्वस्थ्य जीवनशैली को अपनाकर काफी हद तक हृदय रोग से बचा जा सकता है। वि हृदय दिवस पर बृहस्पतिवार को मैक्स अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञों ने यह बात कही है। सुभाष रोड स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में अस्पताल की कार्डियोलाजी विभाग की डायरेक्टर डा. प्रीति शर्मा ने कहा कि भारत में हर साल हृदय रोग या सीवीडी से 17.5 मिलियन मौतें होती हैं।
गतिहीन जीवनशैली, अत्यधिक तनाव, अनिंद्रा, धूम्रपान व शराब का अधिक सेवन व्यक्ति के हृदय की जीवनशक्ति को नष्ट करता है। इसके अलावा मुधमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा आदि भी हृदय रोग के मुख्य कारण हैं। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि समाज को जागरूक किया जाना चाहिए। सामूहिक रूप से यह प्रयास किए जाने की जरूरत है। लगातार व्यायाम करना हृदय संबंधी मृत्यु दर और हृदय रोग के बढ़ने के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कवच है।
अस्पताल के कार्डियक थोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी के डायरेक्टर डा. अरविंद मक्कड़ ने कहा कि हाल के वर्षों में युवाओं में हार्ट अटैक के मामलों में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। हृदय रोग जो वैिक मृत्यु का एक प्रमुख कारण है, पिछले पांच वर्षो में भारत में हृदय रोगों में भारी वृद्धि देखी गई है। इस चिंताजनक स्थिति के लिए मुख्य रूप से हमारी आधुनिक जीवनशैली और विकसित होती आदतें जिम्मेदार हैं। 30 से 40 साल की उम्र के लोगों भी काफी संख्या में हृदय रोग की चपेट में आ रहे हैं। वरिष्ठ कार्डियोलाजिस्ट डा. योगेन्द्र सिंह ने कहा कि स्वस्थ आहार का पालन करना हृदय रोग के खतरे को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।
एक संपूर्ण आहार में सभी महत्वपूर्ण पोषक तत्व होने आवश्यक हैं। फ्राइड फास्ट फूड और प्रोसेस्ड विकल्पों से दूर रहना चाहिए। सब्जियां, फल व पूरे अनाज युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। डा. पुनीत सदाना ने कहा कि यह भी चिंताजनक है कि कि कई दिल के दौरे और स्ट्रोक से बचे लोग स्पष्ट चेतावनियों के बावजूद हानिकारक व्यवहार पर लौट आते हैं। इस तरह की खराब गतिविधियों पर नियंतण्रजरूरी है।