इतना ही नहीं, विदाई के समय भी कन्या पक्ष से कोई कीमती वस्तु या नकद राशि न लेकर मात्र 1 रुपये का कन्यादान स्वीकार किया गया। इससे विवाह को सादगी, सम्मान और सामाजिक चेतना की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया गया। फिजूलखर्ची रोकने के उद्देश्य से बारात में डीजे और शोर-शराबे से भी दूरी बनाई गई। शांत और सादगी से निकली बारात ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि विवाह दो परिवारों का पवित्र मिलन है, न कि प्रदर्शन का माध्यम।

इस अनुकरणीय पहल की पूरे जिले में सराहना हो रही है। सामाजिक लोगों का कहना है कि जितेंद्र भाटी का यह कदम उन परिवारों के लिए प्रेरणा है जो विवाह को आर्थिक बोझ बना देते हैं। इस विवाह ने साबित किया है कि यदि जिम्मेदार लोग आगे आएं तो दहेज जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त किया जा सकता है।